मेरा नाम अरविन्द यादव है और मैं आयकर विभाग, नागपुर में आयकर निरीक्षक के पद पर कार्यरत हूं। हम अपने मां-बाप के इकलौते पुत्र हैं, हमारी तीन बहनें हैं, हम परिवार में सबसे छोटे हैं। पिताजी लखनऊ के एक प्रसिद्ध दैनिक अखबार में कार्यरत थे, जिस वजह से हमारे जीवन की शुरुआत लखनऊ में हुई और लखनऊ की ही गलियों में हम बड़े हुए। परिवार में सबसे छोटे होने के कारण हमारी परवरिश बड़े लाड-प्यार से हुई। बचपन से ही हमारा मन पढ़ाई में नहीं लगा, जिसके कारण हमारी पढ़ाई-लिखाई अच्छी नहीं रही। फिल्में देखने का शौक हमें बचपन से था जिस वजह से पिताजी हमें ज्यादा पसंद नहीं करते थे क्योंकि हमारे पिताजी बहुत कर्मठ और अनुशासित थे उन्हें आलसी और लापरवाह लोग बिल्कुल पसंद नहीं थे और वो हमेशा पढ़े-लिखे व अनुशासित लोगों को ही पसंद करते थे। पिताजी की मुझसे काफी अपेक्षाएं थी, परंतु हम अपने पिताजी की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। जीवन में आगे बढ़ने की कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही थी, परंतु मां-बाप का आशीर्वाद और दोस्तों की मोहब्बत रंग लाई और 2011 में हमारा चयन आयकर विभाग, नागपुर में हो गया। हमारा विवाह जिला उन्नाव की ‘पारुल बेगम’ से हुआ और विवाह के एक साल बाद हमारे घर पर एक नन्ही परी का आगमन हुआ जिसका नाम हमने 'बरखा सिंह' रखा। मैंने अपनी जिन्दगी में कोई महान कार्य नहीं किया जिस वजह से मुझे कोई प्रसिद्धि नहीं मिली।