जामुन का साथ और बारिश का मौसम

जामुन करे कैन्सर कोशिकाओं पर वार

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बारिश का मौसम और जामुन का साथ के क्या कहने। इस मौसम में हर उम्र के लोगों के लिए मुफीद है जामुन। बच्चों के लिए तो बारिश में खेल-कूद में जगह बना लेते हैं जामुन। जामुन खाकर जीभ का रंग देखना एक शौक हो जाता है। किसकी जीभ का रंग ज्यादा चढ़ा है ये जानना जामुन से दोस्ती करा जाता है। ज्यादा जामुन खाकर जीभ का रंग गाढ़ा करना खेल होता है बच्चों का। बड़ों के लिए सेहत और स्वास्थ्य के नुस्खे समाय है जामुन।

सेहत की हिदायतें भी याद कराता है जामुन। ज्यादा जामुन खाने से पेट दर्द होगा, बड़ों का ये समझाना आम है। जामुन खाने के बाद किसी का गला बैठ जाना (खराश हो जाना)। जामुन खाने पर कभी खाँसी आ जाना। बचपन की मौज-मस्ती से सयानी समझ तक बहुत कुछ सिखाता बताता है जामुन।

बारिश का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देता है। जामुन इनसे लड़ने में सहायक है। इसके अलावा यह बहुत सी जटिल बीमारियों में लाभकारी है।

अनूठा स्वाद लिए स्वास्थ्यवर्धक जामुन किसी परिचय का मोहताज नहीं। इसका वानस्पतिक नाम साइजीजियम क्यूमिनी है। इसे इंडियन ब्लैक बेरी या जावा प्लम भी कहते हैं।

पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों से आधुनिक अनुसंधान जामुन के औषधीय गुणों का वर्णन करते हैं। चर्चा करते हैं जामुन के इन औषधीय गुणों की…

जामुन का साथ और बारिश का मौसम

सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर

जामुन मिनेरल्स का अच्छा स्रोत है। यह कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, फोस्फोरस, मैग्निशियम की आपूर्ति करता है। इसमें फॉलिक एसिड, आयरन और ज़िंक भी होता है। जामुन में विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है। विटामिन ए, बी1, बी2, बी3, बी5, बी6 और कॉलिन भी इसमें पाये जाते हैं।

अच्छा टॉनिक है जामुन

जामुन टॉनिक की तरह काम करता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा को मजबूत बनाता है। यकृत को शक्ति प्रदान करता है। जामुन रक्त के संगठन को बेहतर करता है।

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जामुन का सेवन एनीमिया की रोकथाम और इलाज में लाभकारी माना गया है। इसमे उपस्थित फाइटोकेमिकल्स और पोषक तत्व इसमें सहायक हैं।

कैल्शियम, फॉसफोरस, विटामिन सी हड्डियों और दाँतों को मजबूती देते हैं। इस वजह से जामुन हड्डियों और दाँतो के लिए लाभकारी माना गया है।

जामुन अच्छा एन्टीऑक्सीडेंट

जामुन बहुत ही अच्छा एन्टीऑक्सीडेंट है। यह फ्लावेनॉइड्स, फेनोलिक्स, केरेटिनॉइड्स, और विटामिन जैसे एन्टीऑक्सीडेंट यौगिकों से भरपूर है।

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एन्टीऑक्सीडेंट कई डिजेनेरेटिव बीमारियों और संक्रमण के खतरे को कम करतें हैं।

जामुन का साथ और बारिश का मौसम

पीलिया, हेपेटाइटिस से लड़े

जामुन यकृत (लिवर) के लिए बहुत अच्छा है। यह यकृत को क्षति से बचाता है। पीलिया और हेपेटाइटिस के इलाज में लाभकारी है। यकृत द्वारा रक्त से अनुपयोगी तत्वों को अलग करने की क्रिया में सहायक है। यह सीरम एएलटी, एएसटी, एएलपी, के बढ़े हुए स्तर को कम करने में प्रभावी है। इनका बढ़ा स्तर यकृत की क्षति, शोथ या अनियमितता को दर्शाता है।

स्प्लीन रखे दुरुस्त

जामुन का सिरका भी एक अच्छा टॉनिक है। जामुन और जामुन का सिरका तिल्ली बढ़ जाना (एनलार्जड स्प्लीन) के इलाज में लाभकारी है।

करे ठीक दस्त और पेचिश

पके जामुन का रस दस्त और पेचिश के इलाज में लाभकारी माना गया है। जामुन का सिरका एस्ट्रिनजेंट है। यह दस्त पर नियंत्रण में प्रभावी है।

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जामुन बचाय बैक्टीरिया संक्रमण से

जामुन जीवाणु (बैक्टीरिया) संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है। यह ग्राम पॉज़िटिव और नेगिटिव दोनों तरह के बैक्टीरिया पर प्रभावी है। पेट और आंतों के कई संक्रमण से बचाव और इलाज में सहायक है।

एलर्जी प्रभावों को करे कम

जामुन में उपस्थित कई फ्लावेनोइड्स और विटामिन सी में एलर्जीरोधी गुण होते हैं। यह विषाणुरोधी (एन्टीवायरल) और सूजन दूर करने का गुण भी देते हैं। जामुन में ज्वर-निवारक (एन्टी-पाइरेटिक) गुण भी होते हैं। जामुन का सेवन अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और बुखार से बचाव में सहायक माना गया है। यह इनकी तीव्रता को कम करने में भी सहायक माना गया है।

एन्टीनेफ़्रोटॉक्सिक है जामुन

जामुन गुर्दे (किडनी) को क्षति से बचाता है। यह मूत्र और मूत्र के साथ निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को शरीर में जमा होने से रोकता है। यह रक्त में बढ़े यूरिया नाइट्रोजन (ब्लड यूरिया नाइट्रोजन) को कम करता है। सीरम क्रेटिनिन, सीरम प्रोटीन, और यूरिनरी प्रोटीन के बढ़े स्तर को कम करता है।

मधुमेह की जटिलताएँ करे दूर

जामुन रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित करता है। यह फास्टिंग ग्लुकोज़ का स्तर नियंत्रित करने में प्रभावी है। यह रक्त में इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाता है। इंसुलिन को अक्रियाशील करने वाले एन्जाइम इन्सुलिनेज के प्रभाव को कम करता है।

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यह मधुमेह से होने वाली नसों की समस्याओं को रोकने में सहायक है। नसों को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्न होने की समस्या में बाधक है। आँखों और दृष्टि से संबन्धित समस्याओं को रोकने में सहायक है।

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कैन्सर कोशिकाओं पर करे वार

कैन्सर से बचाव और इलाज में जामुन उपयोगी है। विशेषतौर पर यह कोलन और ब्रेस्ट कैन्सर के लिए प्रभावी माना गया है। यह कैन्सर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। कैन्सर कोशिकाओं के पुनः बनने को भी रोकता है। गैलिक एसिड, एलाजिक एसिड, फ्लावेनॉइड्स, एन्थोसायनिन इसमें प्रभावी होते हैं।

अल्सर की क्षति से बचाए

अल्सर कारक तत्वों के प्रभाव को कम करने में जामुन सहायक है। इसको उबालकर तैयार सत पेट के अल्सर में लाभकारी है। यह एसिडिटी को कम करता है। अपच से निजात दिलाता है। आमाशय की झिल्ली को क्षति से बचाता है।

हृदय को दे सुरक्षा

हृदय के लिए लाभकारी है जामुन और इसका सिरका। यह कोलेस्टेरॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। यह मूत्र को बढ़ाने वाला (डाईयूरेटिक) है। इसमें पोटेशियम की उपस्थिती होती है। इससे उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। स्ट्रोक का खतरा कम होता है और हृदय रोगों से बचाव होता है।

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अर्थेराइटिस, गठिया करे काबू

शोथ रोधी, पीड़ानाशक है जामुन। यह संक्रमण या चोट से होने वाले सूजन, लाली और दर्द को काबू करने में सहायक है। गठिया, अर्थेराइटिस की तीव्रता कम करने में सहायक माना गया है जामुन।

जिंजिवाइटिस, बवासीर पर करे वार

मसूढ़ों में सूजन, खून आना, लाल होना (जिंजिवाइटिस) के इलाज में यह सहायक है। यह बवासीर के इलाज में भी सहायक है।

आँखों को रखे स्वस्थ

इसमें एन्थोसायनिन यौगिक पाया जाता है। ये रेटिना को सुरक्षा प्रदान करते हैं। दृष्टि को सामान्य रखने में सहायक है। विटामिन सी और ए की उपस्थिती आँखों को स्वस्थ रखने में सहायक है।

जामुन मोटापे से बचाए

पाचन को दुरुस्त करता है जामुन। यह फाइबर का स्रोत है। यह चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) में सुधार करता है। इसका सेवन चयापचय से जुड़ी अनियमितताओं और मोटापे से बचाव में सहायक है।

रक्त शोधक है

रक्त शोधक जामुन कील मुहांसों को दूर रखने में सहायक होता है। एस्ट्रिनजेंट गुण के साथ यह त्वचा को स्वस्थ रखने में लाभदायक है।

ध्यान दें:

  • जामुन को खाली पेट नहीं खाना चाहिए। एक बार में इसके बहुत ज्यादा सेवन से पेट में दर्द हो सकता है। कुछ लोगों को इसके ज्यादा सेवन से गले में खराश जैसी समस्या हो सकती है। खांसी की समस्या हो सकती है। सीने में जकड़न जैसा महसूस हो सकता है।
  • सामान्य अवस्था में इसको नमक, गोलमिर्च डालकर खाएं। इससे जामुन से संभावित दिक्कतों से बचाव होता है। नमक में काला नमक या सेंधा नमक का इस्तेमाल करें। रोग की अवस्था में विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करें।
  • गर्भवती स्त्रियाँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें। व्यक्तिगत सलाह के आधार पर ही इसका सेवन करें।
  • जामुन सेवन के तुरंत पहले या बाद में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। कम से कम दो घंटे रुक कर तब दूध का सेवन कर सकते हैं।
नोट : इस लेख का उद्देश्य जानकारी और चर्चा मात्र है। आहार में एकदम से बदलाव या जीवन शैली में परिवर्तन विशेषज्ञ से व्यक्तिगत परामर्श का विषय है।

संदर्भ स्रोत:

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