Amika Chitranshi
Aahar Samhita by Amika

- Advertisement -

- Advertisement -

कैथा है पोषण की खान

0 1,227

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

कैथा जंगली पादप श्रेणी का फल है। कैथा को नाम से बहुत लोग जानते होंगे पर इसका इस्तेमाल भोजन में कम ही घरों में होता है। गाँव में भी इसके पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। कैथे का कच्चा और पका फल दोनों खाने योग्य होता है। कचा फल खट्टा हल्का कसैला (एस्ट्रिंजेंट) और पका फल खट्टा-मीठा होता है। कच्चा फल देखने में ग्रे-सफ़ेद मिश्रित हरे रंग का और पका फल भूरे रंग का होता है।

इसका छिलका वास्तव में खोल की तरह होता है। ये लकड़ीनुमा मोटा और सख्त होता है बिलकुल वैसे ही जैसे बेल के फल का होता है। कैथे के फल से सामान्यतः चटनी ही बनाई जाती है, कुछ लोग इससे शर्बत, जैम, और जेली भी बनाते है। थोड़ी मात्रा में पके फल को लोग नमक के साथ ऐसे भी खाते हैं।

कैथे को भिन्न क्षेत्रों में अलग नाम से पुकारा जाता है। इसे बंगाली में कठबेल (Kathbel), गुजराती-कोथु (Kothu), कन्नड-बेले (Bele), मलयालम और तमिल-विलम पज़म (Vilam pazam), मराठी-कवथ (Kavath), उड़िया-कैथा (Kaitha), तेलगु-वेलेगा पंडु (Velega pandu) कहते हैं।

कैथे पर हुए शोध बताते हैं कि:

पके फल की अपेक्षा कैथे के कच्चे फल में विटामिन सी और अन्य फ्रूट एसिड की अधिक मात्रा होती है वहीं बीज में प्रोटीन ज्यादा मात्रा में होता है। बीज में सभी आवश्यक लवण (मिनेरल्स) पाये जाते हैं तो गूदे (पल्प) में कार्बोहाइड्रैट और फाइबर होता है। कैथे का बीज सहित सेवन किया जाता है इसके बीज को निकालने की आवश्यकता नहीं होती।

इस आधार पर कैथे में कार्बोहाइड्रैट, प्रोटीन और फाइबर काफी अच्छी मात्रा में पाये जाते हैं। कैथे का कच्चा फल विटामिन सी का भी अच्छा स्रोत है। कैथे में आयरन, कैल्शियम, फोस्फोरस और ज़िंक भी पाये जाते हैं। इसमें विटामिन बी1 और बी2 भी उपस्थित होता है। कैथे के सूखे बीजयुक्त गूदे में इन लवण और विटामिनों की काफी अच्छी मात्रा होती है।

प्रतिरक्षा तंत्र की सामान्य क्रिया के लिए ज़रूरी है ज़िंक

पोषक तत्वों के मुख्य कार्य के आधार पर कार्बोहाइड्रैट ऊर्जा प्रदान करता है। प्रोटीन शरीर निर्माण, वृद्धि और विकास के लिए ज़रूरी है। आयरन खून की कमी को दूर रखने के लिए ज़रूरी है। कैल्शियम और फोस्फोरस हड्डियों तथा दाँतो के निर्माण के लिए आवश्यक है। ज़िंक प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम ) कि सामान्य क्रिया के लिए ज़रूरी है।

विटामिन सी ऐंटीओक्सीडेंट होने के साथ आयरन के अवशोषण के लिए ज़रूरी है। विटामिन बी1 और बी2 कार्बोहाइड्रैट के ऊर्जा (एनर्जी) में बदलने तथा त्वचा, तंत्रिका तंत्र और आँखों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। फाइबर बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव और नियंत्रण में सहायक है जैसे मधुमेह, मोटापा, हृदय धमनी रोग, कैंसर, कब्ज आदि।

कैथे में फाइटोकेमिकल भी पाये जाते हैं। इसमें एलकेलोइड और पॉलीफेनोल वर्ग के तत्व काफी अच्छी मात्रा में होते हैं जो इसे कई रोगों से बचाव, रोकथाम और इलाज़ में सक्षम बनाते हैं।

पारंपरिक इस्तेमाल के विश्लेषण और शोध बताते हैं कि:

कैथा स्कर्वी रोग से बचाव और इलाज में सहायक है। यह शोथरोधी, ज्वरनाशक, दर्दनाशक, कैंसररोधी और मधुमेहरोधी है। कैथा घावपूरक, पेशाब बढ़ाने वाला और जीवाणुरोधी भी है। यह लिवर को डैमेज होने से बचाने वाला, लिवर और हार्ट टॉनिक है। ये हिचकी, पेट में गैस, गले और मसूढ़ों की बीमारियों के इलाज़ में सहायक है। इसका सेवन श्वेत-प्रदर, पीलिया, बदहजमी और रक्त की अशुद्धियों के इलाज में लाभदायक है। कैथे का बीज रहित गूदा (पल्प) पेचीश, दस्त और पाइल्स से निजात दिला सकता है।

वैज्ञानिक कैथे का इस्तेमाल बीमारियों से बचाव के लिए , स्वस्थ्य वर्धक के तौर पर और पोषक तत्व समृद्ध आहार (न्यूट्रिएंट-एनरिच्ड फूड) बनाने के लिए करने के पक्ष में हैं।

कैथे के फल के अलावा इसकी जड़, छाल, और पत्तियों में भी बहुत से औषधीय गुण पाये जाते हैं।

नोट: किसी भी नए भोज्य पदार्थ को अपने भोजन में शामिल करने से पहले या भोज्य पदार्थ को नियमित भोजन (रूटीन डाइट) का हिस्सा बनाने से पहले अपने डाइटीशियन, और डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

- Advertisement -

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More